भूमिका: कल हमने देखा कि कैसे कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने महज़ कुछ दिनों में करोड़ों युवाओं को अपने साथ जोड़ लिया। लेकिन कहानी यहाँ खत्म नहीं होती। जब एक इंटरनेट मेम (meme) वास्तविक मुद्दों जैसे NEET पेपर लीक और बेरोज़गारी पर बात करने लगा, तो सत्ता के गलियारों में खलबली मच गई। आज हम बात करेंगे कि कैसे एक डिजिटल आंदोलन को दबाने की कोशिश की गई।
1. डिजिटल स्ट्राइक: ट्विटर बैन और हैकिंग की कोशिशें CJP की लोकप्रियता से घबराकर सरकार ने कड़े कदम उठाए। 21 मई को, पार्टी बनने के मात्र 5 दिन बाद, इसके ट्विटर अकाउंट को भारत में ब्लॉक कर दिया गया।
- तर्क: इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के इनपुट के आधार पर इसे 'राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा' बताया गया।
- जवाब: युवाओं ने सवाल उठाया कि क्या असली पेपर लीक और भ्रष्टाचार राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा नहीं हैं, लेकिन एक मज़ाक भरा पेज खतरा बन गया?। इसके बाद CJP ने 'Cockroaches Back' नाम से बैकअप अकाउंट बनाया, लेकिन उनके इंस्टाग्राम और वेबसाइट को भी हैक करने और बंद करने की कोशिशें की गईं।
2. गंभीर मुद्दों पर प्रहार: धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा CJP केवल मेम्स तक सीमित नहीं रही। उसने NEET परीक्षा में हुई धांधली को लेकर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करते हुए एक याचिका (petition) शुरू की।
- इस वीडियो को एक घंटे में 1 करोड़ से ज़्यादा व्यूज मिले।
- लगभग 6 लाख लोगों ने इस इस्तीफे की मांग पर हस्ताक्षर किए। यही वह मोड़ था जहाँ CJP एक 'जोक' से बदलकर एक 'राजनीतिक खतरा' बन गई।
3. व्यक्तिगत हमले और मौत की धमकियाँ संस्थापक अभिजीत दीपके को चुप कराने के लिए डराने-धमकाने का सिलसिला शुरू हुआ:
- उन्हें व्हाट्सएप पर सीधे मौत की धमकियाँ मिलीं। संदेशों में कहा गया कि या तो पैसे लेकर अकाउंट बंद कर दो, BJP जॉइन कर लो, वरना अमेरिका में मार दिए जाओगे।
- उनके परिवार को, जो महाराष्ट्र में रहते हैं, उनके घर जाकर धमकाया गया।
- उन पर 'विदेशी शक्तियों' और 'आम आदमी पार्टी' के साथ मिलकर साजिश रचने के आरोप लगाए गए, हालांकि अभिजीत ने कभी भी AAP के साथ अपने पुराने काम को छुपाया नहीं था।
4. प्रोपेगेंडा और 'पाकिस्तानी एजेंट' का टैग जब कानूनी तौर पर CJP को रोकना मुश्किल हुआ, तो सोशल मीडिया पर एक पुराना 'टूलकिट' इस्तेमाल किया गया:
- दावा किया गया कि CJP के 49% फॉलोअर्स पाकिस्तान से हैं।
- सच्चाई: स्क्रीन रिकॉर्डिंग और डेटा से पता चला कि 94% से ज़्यादा फॉलोअर्स भारत से ही थे।
- आईटी सेल ने उन्हें 'ISI का एसेट' तक घोषित कर दिया, ठीक वैसा ही जैसा लद्दाख के सोनम वांगचुक या विपक्ष के नेताओं के साथ किया जाता रहा है।
5. भविष्य क्या है? विकेंद्रीकृत आंदोलन (Decentralized Movement) ध्रुव राठी के अनुसार, तानाशाह सरकारें अक्सर जनता की एकजुटता से डरती हैं। CJP ने दिखाया है कि अगर 2.5 करोड़ फॉलोअर्स अपनी प्रोफाइल पिक्चर बदल लें और खुद पोस्ट साझा करने लगें, तो कोई भी सेंसरशिप इस आवाज़ को नहीं दबा सकती।
निष्कर्ष: CJP का सफर हमें सिखाता है कि आज के दौर में इंटरनेट केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि विरोध का एक सशक्त माध्यम है। जब मुख्यधारा की मीडिया चुप हो जाती है, तो 'कॉकरोच' जैसे डिजिटल सिपाही ही सिस्टम को आईना दिखाते हैं।
क्या आपको लगता है कि किसी सोशल मीडिया पेज को 'राष्ट्रीय सुरक्षा' का हवाला देकर बैन करना सही है? अपनी राय नीचे लिखें।
0 टिप्पणियाँ